Skip to main content

  Hello रोबोटिक बॉय कैसे हो। एक अलग दुनिया में चलोगे मतलब sci fi दुनिया में तो चलो शुरू करते हैं आज का डायलॉग। यह एक साइंस फिक्शन स्टोरी है इसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है इस स्टोरी को केवल आपके मनोरंजन के लिए बनाया गया। उम्मीद करता हूं यह story आपको पसंद आएगी। 

यह कहानी आपके लिए बहुत रोमांचित होने वाली है क्योंकि इस कहानी में आपको पता चलेगा ब्रह्मांड अस्तित्व में आया कैसे।  सन् 2070 एक लड़का है जिसका नाम लुईस है लुइस भी आम लोगों की तरह ही अपना जीवन गुजार रहा था। वह एक मशीन बनाने वाली कंपनी में काम करता है यह कंपनी दुनिया की सबसे महंगी कंपनी है और इसका मालिक दुनिया के सबसे अमीर आदमी है।





  यह कंपनी छोटा-मोटा मशीन नहीं बनाती बल्कि वह मशीन बनाती है जो अंतरिक्ष में यूज होता है।  लुइस का ज्यादातर मन ब्रह्मांड के रहस्य को समझने में लगा रहता था कैसे ब्रह्मांड का जन्म हुआ कैसे इसका अंत होगा। एक बार की बात है जो कंपनी का मालिक था वह एक मीटिंग करता है उसमें बहुत देश के साइंटिस्ट और नेता भी शामिल थे

 उस मीटिंग में एक ऐसी मशीन बनाने की बात की गई जिसकी वजह से किसी भी इंसान को दूसरे  universe में भेजा जा सकता है। सारे साइंटिस्ट राजी हो जाते हैं लेकिन अलग-अलग देश के बड़े नेता का मत था कि इस प्रोजेक्ट secret तरह से किया जाएगा जिससे आम जनता को पता ना चले। सबको इनका सुझाव अच्छा लगा।





 इसके लिए एक अलग ऑर्गनाइजेशन बनाई गई और इसके बारे में जनता को बिल्कुल नहीं बताया गया। साइंटिस्टो ने वादा किया वह इस प्रोजेक्ट को 2 से 3 साल में तैयार कर देंगे। लुइस भी इस प्रोजेक्ट को बनाने में मदद करेगा। समय बीतता गया सभी मिलकर इस प्रोजेक्ट को काम रहे थे करीब 1 साल बीत गए 

 वह मशीन लगभग बनी आई थी कुछ समय और बीता मशीन पूरा बन के तैयार हो चुकी है समय था उसे शुरू करने का लेकिन सबके मन में यह डर था की सच में मशीन काम करेगी या फिर इसका भीषण  परिणाम भी हो सकता है

 सबने सोचा हमें और रिसर्च कर लेनी चाहिए। जिससे कोई खतरा ना हो कुछ महीने तक और रिसर्च किया गया इसी बीच दो भाई थे जोकि साइंटिस्ट थे वह दोनों मिलकर मशीन के पास गए और उसमें छेड़खानी करने लगे समय बीता साइंटिस्ट के रिसर्च में यह साबित हो गया। अब इस मशीन को शुरू किया जा सकता है 

तब मशीन को शुरू किया गया लेकिन मशीन स्टार्ट नहीं हुई सब घबरा गए क्योंकि इसमें बहुत ज्यादा रुपया खर्चा हुआ था लुइस भी इसमें बहुत योगदान दिया था इसी के चलते कई सारे साइंटिस्ट लुइस से जलने लगे थे। उन्हीं साइंटिस्ट के बीच वह दोनों भाई थे। उसी में एक और साइंटिस्ट था वह कहता है हमें एक-एक करके इसमें देखना होगा क्या खराबी है सब अपना अपना मत बताएंगे।

 सारे साइंटिस्ट ने मिलकर बहुत प्रयास किया। लेकिन वह मशीन ठीक नहीं होता है तब लुइस कहता है क्या मैं एक बार कोशिश करूं। साइंटिस्ट ने कहा तुम भी प्रयास कर लो शायद तुमसे ठीक हो जाए यह सुनकर लुइस बहुत खुश हो गया। दोनों भाई जोकि साइंटिस्ट है वह भी खुश हो गए क्योंकि वह दोनों जानते थे

की मशीन कैसे शुरू होगी। जैसे ही लुईस उस मशीन के आगे जाता है वैसे ही दोनों साइंटिस्ट जाकर कहते हैं हम मशीन शायद ऐसे चालू कर सकते है जैसे ही वह मशीन चालू होती है उसमें से एक लाइट की बीम निकलती है और लुईस में जाकर समा जाती है इतनी तेज लाइट को देखकर सबकी आंखें चकाचौंध हो गई।

 तभी एक छोटा सा विस्फोट हुआ इसमें काफी साइंटिस्ट मारे गए। यह बात सरकारों तक पहुंच गई और जनता में भी फैल गई। इसलिए सरकार ने इस प्रोजेक्ट को बंद कर दिया। और उन दोनों भाइयों को हमेशा के लिए जेल में डाल दिया। लेकिन लुईस का क्या हुआ वह लाइट की बिम उसे कहां ले गई। लुइस अभी धरती पर ही है वह लाइट की बीम उसे  1000000 किलोमीटर दूर फेंक दी

 लेकिन लुईस अब पहले वाला लुइस नहीं रहा वह उठता है और  देखता है की वह एक ऐसी जगह आ चुका है जहां पर केवल रेत ही रेत था लुईस आंखें बंद कर लेता है और जब उसकी आंखें खुलती है तो वह वहीं पर पहुंच गया था जहां से वह आया था 

और फिर आंखें बंद किया  और जब उसने आंखें खोली तो वह उसी रेत में पहुंच गया था। वह देखता है यह रेतीला जगह एक शहर था कैसे यह रेत में परिवर्तित हो गया। लुइस को यह सब इसलिए दिखाई दे रहा था क्योंकि समय उसके अधीन चल रही थी वह समय में जितना चाहे उतना पीछे जा सकता है 

समय भी उसका  गुलाम बन चुकी थी। वह ब्रह्मांड की गहराइयों में झांकना चाहता था आखिर यह ब्रह्मांड बना तो बन कैसे इसके लिए वह चल दिया आज से लगभग 14 बिलियन साल पहले वह ब्रह्मांड की गहराइयों में जाने लगा वह देखता है कैसे एक छोटे से बिंदु से ब्रह्मांड का जन्म होता है





 उसकी आंखों के सामने करोड़ों ब्रह्मांड बने और करोड़ों ब्रह्मांड खत्म हो गए गैलेक्सी आपस में टकराई और एक नई गैलेक्सी का निर्माण हुआ और पृथ्वी जैसे करोड़ों ग्रह बने और नष्ट हो गए वह देखता है पूरा ब्रह्मांड एक छोटे से बिंदु में समाहित था कैसे इस बिंदु में में महा विस्फोट हुआ और जन्म हुआ

 हमारे ब्रह्मांड का एक से दो ब्रह्मांड बने और दो से चार इस ब्रह्मांड से पहले हर जगह अंधेरा ही अंधेरा था लुईस के मन में इच्छा हुई इस बिंदु में आगे है क्या या फिर इस बिंदु में क्या है जो इतने बड़े ब्रह्मांड को जन्म दिया वह समय को और पीछे करता है वह उस बिंदु में घुसने का प्रयास किया लेकिन ऐसा मानो उसे कोई रोक रहा है

 लुइस वहां से हट गया और फिर समय को और धीमा कर दिया जब उस बिंदु  में विस्फोट हुआ उसके बाद भी ना गैलेक्सी बनी ना कोई स्टार बना हर जगह एक प्रकाश फैल गया और उसने देखा यह ब्रह्मांड तेजी से फैल रहा है लुइस भी  एनर्जी के पार्टिकल्स को अपने में समाहित कर रहा था लुइस के मन में एक और सवाल था 

आखिर यह विस्फोट हुआ कैसे ऐसी कौन सी शक्ति है जो यह सब कर रही है उसे पता करना था पहली गैलेक्सी कौन सी थी और कैसे बनी वह देखता है  यह लाइट आपस में मर्ज होने लगी यह लाइट इतनी ज्यादा थी लुइस वहां से दूर चला जाता है तब उस लाइट के मर्ज होने से एक और विस्फोट हुआ 

अब यह विस्फोट लाइट के मर्ज होने से हुआ या किसी और तरीके से यह तो हम नहीं जानते लेकिन उस विस्फोट में जन्म हुआ हमारी पहली गैलेक्सी का लुइस फिर समय को पीछे करता है और उसने पहले गैलेक्सी का जन्म तो देख लिया अब वह सोचता है अब एक गैलेक्सी से इतने सारे गैलेक्सी कैसे बनती है

 फिर से वही क्रिया होने लगी लाइट आप में मर्ज होती और विस्फोट होता फिर जन्म होता है एक और गैलेक्सी का ऐसे ही करते करते लाखों-करोड़ों ग्लैक्सी का जन्म हुआ समय था यह  देखने का गैलेक्सी के अंदर स्टार्स का कैसे जन्म हुआ और कैसे ग्रहों का जन्म हुआ लुइस एक गैलेक्सी के अंदर जाता है वह देखता है इसमें करोड़ों स्टार का जन्म हो चुका है

 वह समय को पीछे करता है वह इसलिए क्योंकि वह देखना चाहता था पहला स्टार जन्म कैसे हुआ वह देखता है  छोटे-छोटे पार्टिकल  एनर्जी के या फिर matter के आपस में जुड़ रहे थे ग्रेविटी के कारण क्योंकी यह ब्रह्मांड का जन्म है ही एनर्जी और मैटर से हुआ है लुइस देखता है 

यह एनर्जी और उस गैलेक्सी के छोटे-छोटे पार्टिकल या matter आपस में collapse हो रहे है इन मैटर और एनर्जी के कॉलएप्स होने से धीरे धीरे एक स्टार बनता है इसी तरह से कई स्टार्स का जन्म हुआ ग्रेविटी तो ब्रह्मांड के जन्म से शुरू हो गई। अब सवाल आता है

 हमारे ब्रह्मांड में एस्ट्रॉयड या फिर ग्रह कैसे अस्तित्व में आए आखिर हमारे यूनिवर्स में स्ट्राइड्स बना कैसे इस सवाल को जानने के लिए लुइस समय को और आगे करता है और वहां पहुंच जाता है जहां पर स्ट्राइड्स का जन्म नहीं हुआ था उसके बनने की प्रक्रिया शुरू भी नहीं हुई थी आज लुईस हर एक राज से पर्दा उठाएगा। आगे क्या हुआ वह जानेंगे पार्ट 2 में








Comments

Popular posts from this blog

Story of great freedom fighter chandrashekhe Azadr

  चंद्रशेखर आज़ाद उपलब्धियां जन्म: 23 जुलाई, 1906 निधन: 27 फरवरी, 1931 भारतीय क्रन्तिकारी, काकोरी ट्रेन डकैती (1926), वाइसराय की ट्रैन को उड़ाने का प्रयास (1926), लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए सॉन्डर्स पर गोलीबारी की (1928), भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के साथ मिलकर हिंदुस्तान समाजवादी प्रजातंत्रसभा का गठन कियाचंद्रशेखर आज़ाद एक महान भारतीय क्रन्तिकारी थे। उनकी उग्र देशभक्ति और साहस ने उनकी पीढ़ी के लोगों को स्वतंत्रता संग्राम में भागलेने के लिए प्रेरित किया। चंद्रशेखर आजाद भगत सिंह के सलाहकार, और एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे और भगत सिंह के साथ उन्हें भारत के सबसे महान क्रांतिकारियों में से एक माना जाता है।प्रारंभिक जीवन चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले के बदर गाँव में हुआ था। उनके पिता पंडित सीताराम तिवारी और माता जगरानी थीं। पंडित सीताराम तिवारी तत्कालीन अलीराजपुर की रियासत में सेवारत थे (वर्तमान में मध्य प्रदेश में स्थित है) और चंद्रशेखर आज़ाद का बचपन भावरा गाँव में बीता। उनकी माता जगरानी देवी की जिद के कारण चंद्रशेखर आज़ाद को काशी विद्य...

Invisible man

यह एक sci fi story है इसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है यह केवल आपके मनोरंजन के लिए बनाया गया है यह बात है एक सनकी वैज्ञानिक कि जिसका नाम दैमन रोए था। यह अपने नाम की तरह नहीं था यह रोता नहीं बल्कि रूलाता था। दैमन अपने जीवन काल में बहुत से experiment किया वह भी इंसानों और जानवरों पर। लेकिन यह एक्सपेरिमेंट उसके जीवन का सबसे बड़ा एक्सपेरिमेंट था। दैमन  वह एक ऐसी चीज पर काम कर रहा था। जिसे खाने के बाद इंसान एक atom जितने छोटा हो जाए। atom क्या होता है आप लोग chemistry में पढें होंगे तो बात को आगे बढ़ाते हैं वह अपने कंप्यूटर पर रिसर्च कर रहा था की atom जितने छोटे-मोटे के बाद उसके लिए यह दुनिया बदलेगी तो नहीं।  Atom jitna chhota लेकिन भौतिक विज्ञान एक atom जितने छोटे होने की अनुमति नहीं देता है। लगभग सालों बीत जाते हैं वह ज्यादातर समय अपने lab में ही बिताया था आखिर जाकर। वह  केमिकल तैयार हो जाता है लेकिन उसके मन में अभी भी वही एक सवाल था और इसी सवाल के जवाब के लिए वह एक antidote भी बनाया  समय था उस केमिकल को चेक करने का लेकिन पता नहीं उसे क्या हो गया  उस एक्सपेरिमें...

Story of dhyan chand success story

Dhyan Chand Success Story Story The seeds of artistry in hockey were planted and nurtured in him by Subedar Major Tiwari of his regiment. Dhyan Chand got so passionate with this game that he spends several hours every day mastering and innovating new techniques in this game. Indian team participated in the Hockey Tournament for the first time in the VIII Olympiad held at Amsterdam in 1928. India won the championship by 3-0. Out of the three goals two were scored by Dhyan Chand. In 1932 Olympics at Los Angeles, Indian team under the captainship of Lal Shah Bukhari again won the championship. India defeated America by 24-1 and thus set a world record. Nine out of 24 goals were scored by Dhyan Chand and ten by his younger brother, Roop Singh. For me he was the great hero that India ever produced in sports. Unfortunately for him there was no TV to spread his fame, get all the revenue for advertising. A referee asked his stick to be checked as he suspected there was glue in his stick as the...