Skip to main content

Sci fi on parallel universe

 सबसे पहले मैं आपको बतादूं की parallel universe होता क्या है तो parallel universe मतलब समानांतर ब्रह्मांड होता है अभी भी नहीं समझे चलो फिर समझते हैं हम लोग अभी पृथ्वी पर रहते हैं लेकिन हमारी पृथ्वी जैसे कई सारी पृथ्वीया है।


Parallel universe 


 आज से 100 _200 साल पहले साइंटिस्ट यही मानते थे कि हमारे ब्रह्मांड में केवल एक ही galaxy है वह है हमारी milkyway galaxy। 

 लेकिन आने वाले कुछ सालों में है हमे पता चला की हम इस ब्रह्मांड में अकेले नहीं है इस ब्रह्माड में अरबों खरबों गैलेक्सी है लेकिन मैं आपको एक ऐसी बात बताऊंगा जिसे सुनकर आप क्यों जाएंगे।

 आज से लगभग 5000 साल पहले हमारे भगवत गीता में इस बात का जिक्र हो चुका है की ब्रह्मांड एक नहीं अनेक है और समानांतर ब्रह्मांड का भी जिक्र हुआ है यह ब्रह्मांड अलग-अलग डायमेंशन से जुड़ा हुआ है हम जिस डायमेंशन में रहते हैं उसे हम जानते हैं

 3rd डायमेंशन से अगर हम टाइम ट्रेवल करेंगे भूतकाल में तो हम किसी और डायमेंशन में पहुंच जाएंगे। लेकिन वह हमारे पृथ्वी ही होगी लेकिन दूसरी टाइमलाइन पर। तो ज्यादा टाइम ना गवाते हुए शुरू करते हैं साइंस फिक्शन स्टोरी को 


यह एक science fictional story है इसका वास्तविक से कोई संबंध नहीं है यह केवल आपके मनोरंजन के लिए बनाया गया है सन 2050 तो यह कहानी शुरू होती है एक बच्चे से जिसका नाम नेपथीलिन है नेपथीलिन अभी 18 साल का है वह अपने जीवन में कभी स्कूल नहीं गया लेकिन 18 साल के हर दिनों में 18 घंटे केवल किताब पढ़ता था वह एक  trillionaire  बनने का सपना देखता है तो मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं आज तक कोई भी trillionaire नहीं बना वह भी डॉलर में। naphthalene बहुत गरीब है 

इसलिए वह स्कूल कभी नहीं जा पाया वह बड़े-बड़े साइंस लैब के बाहर से छोटी मोटी मशीन को अपने घर लाकर उनसे कुछ सीखता था एक दिन वह science lab के बाहर बैठा था तभी उसे एक  लॉकेट मिलता है वह उसे  उठा लेता है वह लॉकेट बहुत चमक रही थी। naphthalen ने उसे अपने गले डाल लिया। उस लॉकेट में एक बटन भी था

 जैसे ही वह उस बटन को दबाता है सब चीजें रुक जाती हैं ऐसा मानो की समय ही रुक गया। लेकिन उस लॉकेट का इस पर कोई असर नहीं हुआ। naphthalen एक बार और उसे दबाता है तो सब कुछ पहले जैसा हो गया। वह समझ गया कि यह लॉकेट टाइम को रोक सकती है

 लेकिन naphthalen के मन में और भी कई सारे सवाल थे की यह लॉकेट और भी कुछ कर सकता है इसे जानने के लिए वह-वहां की सबसे बड़ी लाइब्रेरी में गया उसे लगा इसपर  कोई बुक तो जरूर लिखी गई होगी।

 वह लाइब्रेरी में चला गया। और  बुक खोजने लगा। उसने बहुत प्रयास किया लेकिन वह बुक नहीं मिली तो उसने सोचा क्यों न इस लाइब्रेरी में छुप जाए रात में उस किताब को फिर से ढूंढेगे।

 अपने प्लान के अनुसार वह library में छुप गया। जब लाइब्रेरी बंद होने का समय आया वहां के सारे लाइट को ऑफ कर दिया गया अब लाइब्रेरी में बिल्कुल अंधेरा था naphthalen डर गया अचानक वह एक रैक से टकराता है तो उस रैक में से बुक गिरने लगती हैं

 वह अपने लॉकेट की मदद से उस बुक को गिरने से रोक देता है सब कुछ हवा में था वह जल्दी से लाइट ऑन करने का स्विच ढूंढता है उसे वह स्विच मिल जाती है वह लाइट को ऑन करता है तो 

वह देखता है की बुक तो हवा में लटकी है वह सारी बुक को अपनी सही जगह पर लगाने लगता है उसके हाथ एक बुक लगती है उस बुक पर उस लॉकेट की चित्र बना हुआ था नेप्थलीन बहुत खुश हुआ क्योंकि  उसको  बुक को मिल गई। वह उस बुक को पढ़ने लगा। 

उसमें लिखा था लॉकेट में बहुत प्रकार की  शक्तियां थी। लॉकेट की मदद से समय को रोका जा सकता है और कहीं भी आया जाया जा सकता है बहुत तेज। अगर उस लॉकेट के बटन को लंबे समय तक दबाए जाए और 

किसी भी जगह का नाम चाहे वह past में हो या  फ्यूचर में हो कही भी लॉकेट उसे वहां भेज सकता है और अपने समय में आने का तरीका भी वहीं था naphthalen सब कुछ पहले जैसा कर देता है और 

वहां से निकल जाता है। वह उस locket को देर तक दबाता है और कहता है मुझे अपने घर जाना है जब उसका आँख खुलता है तो वह अपने घर पर था। अचानक उस लॉकेट में से एक रोशनी निकली और वह लॉकेट हवा में उड़ने लगा। 

तभी उस लॉकेट में से आवाज आई।ए लडके तेरा नाम नेप्थलीन है न  यह सब देखकर वह हैरान हो गया कि कौन बोल रहा है। तभी  लॉकेट में से फिर आवाज आई।  मै लॉकेट बोल रहा हूं अगर तू चाहता है कि मैं तेरे साथ हमेशा रहूं मेरे एक सवाल का जवाब दे की रोबोट्स कब इंसानों  ko गुलाम बना सकते हैंनेप्थलीन कहता है कि

 मुझे थोड़ा समय चाहिए इस बात को सोचने के लिए। 1 दिन बाद नेप्थलीन उसके सवाल का जवाब दे देता है उसके सवाल का जवाब था रोबोट के अंदर अपने होने का आभास नहीं है लेकिन इंसानों में है लोकेट कहती है

 तुम्हारा जवाब बिल्कुल सही है आज से मैं तुम से ऐसे चिपकुंगा। जैसे किसी बॉडी साथ उसकी परछाई। लॉकेट वापस आकर नेप्थलीन के गले में समा गया। 














Comments

Popular posts from this blog

Story of great freedom fighter chandrashekhe Azadr

  चंद्रशेखर आज़ाद उपलब्धियां जन्म: 23 जुलाई, 1906 निधन: 27 फरवरी, 1931 भारतीय क्रन्तिकारी, काकोरी ट्रेन डकैती (1926), वाइसराय की ट्रैन को उड़ाने का प्रयास (1926), लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए सॉन्डर्स पर गोलीबारी की (1928), भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के साथ मिलकर हिंदुस्तान समाजवादी प्रजातंत्रसभा का गठन कियाचंद्रशेखर आज़ाद एक महान भारतीय क्रन्तिकारी थे। उनकी उग्र देशभक्ति और साहस ने उनकी पीढ़ी के लोगों को स्वतंत्रता संग्राम में भागलेने के लिए प्रेरित किया। चंद्रशेखर आजाद भगत सिंह के सलाहकार, और एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे और भगत सिंह के साथ उन्हें भारत के सबसे महान क्रांतिकारियों में से एक माना जाता है।प्रारंभिक जीवन चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले के बदर गाँव में हुआ था। उनके पिता पंडित सीताराम तिवारी और माता जगरानी थीं। पंडित सीताराम तिवारी तत्कालीन अलीराजपुर की रियासत में सेवारत थे (वर्तमान में मध्य प्रदेश में स्थित है) और चंद्रशेखर आज़ाद का बचपन भावरा गाँव में बीता। उनकी माता जगरानी देवी की जिद के कारण चंद्रशेखर आज़ाद को काशी विद्य...

Invisible man

यह एक sci fi story है इसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है यह केवल आपके मनोरंजन के लिए बनाया गया है यह बात है एक सनकी वैज्ञानिक कि जिसका नाम दैमन रोए था। यह अपने नाम की तरह नहीं था यह रोता नहीं बल्कि रूलाता था। दैमन अपने जीवन काल में बहुत से experiment किया वह भी इंसानों और जानवरों पर। लेकिन यह एक्सपेरिमेंट उसके जीवन का सबसे बड़ा एक्सपेरिमेंट था। दैमन  वह एक ऐसी चीज पर काम कर रहा था। जिसे खाने के बाद इंसान एक atom जितने छोटा हो जाए। atom क्या होता है आप लोग chemistry में पढें होंगे तो बात को आगे बढ़ाते हैं वह अपने कंप्यूटर पर रिसर्च कर रहा था की atom जितने छोटे-मोटे के बाद उसके लिए यह दुनिया बदलेगी तो नहीं।  Atom jitna chhota लेकिन भौतिक विज्ञान एक atom जितने छोटे होने की अनुमति नहीं देता है। लगभग सालों बीत जाते हैं वह ज्यादातर समय अपने lab में ही बिताया था आखिर जाकर। वह  केमिकल तैयार हो जाता है लेकिन उसके मन में अभी भी वही एक सवाल था और इसी सवाल के जवाब के लिए वह एक antidote भी बनाया  समय था उस केमिकल को चेक करने का लेकिन पता नहीं उसे क्या हो गया  उस एक्सपेरिमें...

Story of dhyan chand success story

Dhyan Chand Success Story Story The seeds of artistry in hockey were planted and nurtured in him by Subedar Major Tiwari of his regiment. Dhyan Chand got so passionate with this game that he spends several hours every day mastering and innovating new techniques in this game. Indian team participated in the Hockey Tournament for the first time in the VIII Olympiad held at Amsterdam in 1928. India won the championship by 3-0. Out of the three goals two were scored by Dhyan Chand. In 1932 Olympics at Los Angeles, Indian team under the captainship of Lal Shah Bukhari again won the championship. India defeated America by 24-1 and thus set a world record. Nine out of 24 goals were scored by Dhyan Chand and ten by his younger brother, Roop Singh. For me he was the great hero that India ever produced in sports. Unfortunately for him there was no TV to spread his fame, get all the revenue for advertising. A referee asked his stick to be checked as he suspected there was glue in his stick as the...